जिन्दगी जीने के लिये दाल रोटी हवा पानी काफी है लेकिन जिन्दगी को खूबसूरत बनाता है थोड़ा सा प्यार..थोड़ा सा अपनापन...थोड़ी सी शरारत...थोड़ा सा अनकहा इश्क....दोस्तों हर सोमवार, बुद्धबार मातृभारती पर प्रकाशित हो रहा है 'एक बूँद इश्क' ...आप सब का इतना स्नेह इस कहानी को मिल रहा है कि मेरे पास शब्द नही हैं..बहुत बहुत आभार मित्रों.....
छाया अग्रवाल