स्त्री प्रेम पाने के लिए देह लुटा देती है पुरुष देह पाने के लिए प्रेम भी खो देता है
देह प्राप्ति के बाद गायब होता है, पुरुष का प्रेम और देह समर्पण के बाद प्रेम को तरसती है स्त्री.
प्रेम रूह का श्रृंगार है
जिस्म का प्रेम तो मिथ्या है ,भ्रम है, लालच है
धोखा है,दुःख का कुआ है।