न जाने यह हो क्या रहा है?
शब्द जैसे मुझसे रूठ से गए है,
मेरा साथ छोड़ के ही चले गए है।
खोजने पर कुछ शब्द मिलें है,
लेकिन ना जाने क्यों मुझसे क्रोधित है,
पंक्तियों में बैठना ही नहीं चाह रहे है।
कुछ को समझा- बुझा कर बैठाया है,
लेकिन पंक्तियां ही मुझे पसंद नहीं आ रही।
न जाने यह क्या हो गया है?