दु:ख इंसान के साथ बढ़ा होता है लेकिन उसे खत्म करने का काम केवल इंसान के हाथ में होता है। शायद इसलिए लोग जीवन में सफल होना चाहते है, कि वे अपने अतीत के दुखों से भविष्य में छुटकारा पा सके। सुशांत को इतनी सफलता मिलने के बाद आत्महत्या कर लेना उन युवाओं को अधिक निराश करेगा जो सुशांत की तरह संघर्ष कर अपने अतीत के दु:खों को सफलता के बाद खत्म करना चाहते है। लेकिन सुशांत ने जाते-जाते बता दिया। सफल होने के बाद भी व्यक्ति का दु:ख उतना ही होता है, जितना संघर्ष के दिनों में। आज यकिन हुआ फिल्म में अभिनेता केवल अभिनय करते है, वह उनके जीवन से जुड़ा नहीं होता। छिछोरे फिल्म में सुशांत ने अभिनय किया था। फिल्म में जो संदेश दिए थे सब अभिनय था। अगर सच होता तो सुशांत भी दुख के पहले और बाद की पूरी तैयारी करते। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।