#सरकार और #विपक्ष की नीतियां मेरे विचार में
"सब मिले हुए है?"
जहां पर उम्र देख कर जाने दिया जाए उस सिनेमा-घरों में लगने वाली फिल्मों के लिए सेंसरबोर्ड की व्यवस्था है...
पर हर व्यक्ति की जेब मे जो सिनेमा घर है उसके लिए कोई सेंसरबोर्ड नही...
ऐसा क्यों?
इतनी हिपोक्रेसी क्यों?
क्या ये सरकार एप्पलीकेशन बेस सिनेमाघरों को सेंसर नही कर सकती?
अगर जवाब हा है तो सरकार ऐसा क्यों नही कर रही ओर विपक्ष ऐसी मांग क्यो नही कर रहा?
कुछ तो गड़बड़ है...
एप्लीकेशन बेस सिनेमा को सरकार सेंसर करे तो भी बुद्धि जीवियों और विपक्षी दलों की * अभिव्यक्ति की आज़ादी * छीनते हो वैसी गाली खाएगी...
हर बार ह्यूमन राइट की बात कर सरकार पर प्रहार करने वाला ये हिपोक्रेट विपक्षी दलों को इस बार किसी वेब सीरीज़ में हो रहे किसी भी तरह के किसी धर्म सम्प्रदाय जाती समूह की बुराई में क्यो ह्यूमन राइट का हनन होता हुआ नही दिख रहा ?
वेब सीरीज़ के बारे में हो रहे बवाल के बावजूद सरकार और विपक्ष की चुप्पी एक ही बात की और ध्यान खींचते है कि "सब मिले हुए है"....