जब भगतसिंह ने बम फेंका, तेवर अपनाये थे बागी।
गोरों का दिल दहला डाला, भारत की जनता थी जागी।।
गांधी-नेहरु से नेता भी, जो सत्याग्रह पथ पर चलते।
वे भगतसिंह से बागी से, भीतर ही भीतर थे जलते।।
आजाद मिटा कर गोरों का, था अब पुनः दमन चक्र घूमा।
नौनिहाल फांसी पर झूले,निज हाथों से फंदा चूमा।।
गांधी जी ने भी इरविन से, फांसी उनकी ना रुकवायी।
विवश हुयी भारत की जनता, थीं उसकी आंखें भर आयीं।।
#बाग़ी