क्या लिखूं ये जिंदगी तेरे बारे में
लिखता हूं रो हाथ काप जाते है और रुकता हूँ तो ये दिल
क्या लिखूं ये जिंदगी तेरे बारे में
जब से माना तुझे अपनी जिंदगी
हँसता हूँ तो भी तू याद आती है रोता हु रो भी तु याद आती है
क्या लिखूं ये जिंदगी तेरे बारे में
चलना है तो तेरे ही साथ ताउम्र
सोचता हूँ तो दिल काप जाता हूं बोलता हूं तो जुबा लड़खड़ा जाता है
क्या लिखूं ये जिंदगी तेरे बारे में।
सोचता हूं कभी राहु अकेला तन्हा मैं
सोचता हूं गर ऐसा हुआ तो ओ आखिरी पल हो मेरा
रह भी नही पाता सह भी नही पाता
हमेसा नजरो के सामने रखना चाहता
क्या लिखूं ये जिंदगी तेरे बारे में
लिखना तो बहुत कुछ है
आज के लिए ही इतना ही सही
क्या लिखूं ये जिंदगी तेरे बारे में।।