मुझे पसन्द है कम बोलना,
शान्त रहना,
भीड़ से अलग रहना,
अपने दिल की बात आईने के सामने बैठ,
उस आईने में दिखने वाली लड़की से कहना,
जो मुझे बड़े ही सब्र से बैठ कर सुनती है,
उसका मेरे अच्छे ये बुरे बातों से कोई फर्क न पड़ना,
मुझे अच्छा लगता है उससे ही सिर्फ बात करना,
अपने सारे सुख-दुख को डायरी में लिखना,
और फिर,
उस डायरी को फाड़ देना,
ताकि वो सारे सुख-दुख अपने आप ख़त्म हो जाए,
और फिर से एक नई डायरी लिखना,
जिसमें मेरे नए नए अनुभव शामिल होते हैं,
और हर बार ये नए अनुभव उस पुराने दुख के अनुभव से ज्यादा गहरे और तीक्ष्ण होते जाते हैं,
और मैं और भी सख़्त, संगदिल होते जाती,,,,,
~सिद्ध साहित्य