वो आहिस्ता आहिस्ता
बढ़ी आगे
और हौले से कहा उसने
समय के कानों में -
तुम जल्द आना
मैं इन्तज़ार करूंगी तुम्हारा
उसी वीराने में
पूरी शिद्दत से
जहां
शायद तुम ठहरो
पल दो पल
और
तुम्हारी आंखों में
देखूंगी मैं
पलते हुए मासूम सपनों
का रंग लिए
अक्स अपना
:- भुवन पांडे
#शीघ्र (जल्द)