आज की प्रतियोगिता "
#शीघ्र .विषय "
विधा .कविता ***
शीध्र किसी के दिल ,में छा जाता हूँ ।
पल में उसे अपना ,बना भी लेता हूँ ।।
दिल की बात पल ,में जान भी लेता हूँ ।
शातीर आँखों को ,पल में पहचान लेता हूँ ।।
कोई किस दृष्टि से ,देखता जान लेता हूँ ।
अपने पराये की ,पहचान पल में कर लेता हूँ ।।
शीध्र कोई काम ,कभी भी नहीं करता हूँ ।
हर पांव धरती ,पर सोच कर रखता हूँ ।।
शीध्र किया निर्णय ,पल में पहचान लेता हूँ ।
धूलधूसरित होने ,से पहले बचा भी लेता हूँ ।।
मैं कवि बडा नादान ,दिल में उतर जाता हूँ ।
दिल के सभी दर्द ,अपनी लेखनी से भूला देता हूँ ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।