खाली वक्त में या सोने से ठीक पहले मैं कल्पना करता हूँ पैरेलल टाइमलाइन की .. सोचता हूँ कि ज़िन्दगी में ये नही ये हुआ होता ऐसे नही ऐसे हुआ होता तो मैं कहाँ होता है कैसा होता ... अब मुझे बहुत सी ज़िंदगियाँ जीनी होती है अलग अलग टाइमलाइन में अपने मन मे !!