Hindi Quote in Story by Kavita Verma

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उम्र खानपान और लापरवाही ने मुकुल पर खासा प्रभाव डाला है। वह अब कामिनी की उमंगों को संभाल नहीं पा रहा है लेकिन कह भी नहीं पा रहा ।वहीं कामिनी मुकुल की उदासीनता को नहीं समझ पा रही है। नीलम जिस दौर से गुजर रही है राकेश उसे समझता तो है लेकिन खुद पर कैसे काबू करे? जवानी का जोश या आदर्श बनने की चाह ने लांग डिस्टेंस रिलेशनशिप का वादा तो कर लिया लेकिन एक बार साथ रहकर अलग-अलग रहना कितना मुश्किल है यह समझ आ रहा है। क्या सुयोग सामने फ्लैट में रहने वाली शालिनी से नजदीकियाँ बढ़ाएगा? क्या मुकुल कामिनी से अपनी मजबूरी बता पायेगा? क्या नीलम का गिल्ट राकेश की उमंगों को साध पाएगा? उम्र के लगभग अंतिम पड़ाव पर एक दूसरे पर निर्भर अरोरा अंकल आंटी का क्या होगा?
आपका प्रिय उपन्यास देह की दहलीज पर अब अपने चरम पर है। जानने के लिए पढ़ें उपन्यास देह की दहलीज पर

Kavita Verma लिखित उपन्यास "देह की दहलीज पर" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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Hindi Story by Kavita Verma : 111463077
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