लगने लगी है अजनभी
मुझको मेरी ही जिंदगी
इल्तजा है कैसी मै चाहता हु क्या
क्या वजूद मेरा , क्या है मेरा पता
रास्ते है जितने लगे अंजान सभी
लगने लगी है अजनभी
मुझको मेरी ही जिंदगी
रेत की तरहा हाथों से छूट गई
ख्वाइशें मेरी मुझसे रुठ गई
काँच के बने रिश्ते
टूट गए जब छन से
छलने लगी है तिषनगी
लगने लगी है अजनभी
मुझको मेरी ही जिंदगी
Sagar...✍️