एक,दो बड़े झटकों के साथ तेज रफ़्तार बस रुक गयी। सभी यात्री ड्राइवर पर भड़क उठे, लेकिन जब पसीने-पसीने से लथपथ ड्राइवर ने बताया कि एक किलोमीटर पहले ब्रेक फेल हो गया था। किसी तरह सँभालते हुए यहाँ रोकना ठीक लगा और ......हम सब बच गए !
पहले तो सभी ने ड्राइवर की भूरी-भूरी प्रशंसा की। मगर कुछ देर बाद यात्रियों को ज्ञान जागृत हुआ।
#एक ने कहा, अगर यहाँ तक ले आये तो धीरे धीरे घर पहुंचा देते।
#दूसरे ने कहा, मैं तो बाइक निकालने से पहले ब्रेक चेक करता हूँ। तुमने क्यों नहीं चेक किया? बड़े ही गैर जिम्मेदार और लापरवाह आदमी हो।
#तीसरे ने कहा, अब इस जंगल में हमारे रहने, खाने का इंतजाम यह ड्राइवर करेगा? हम लोग तो भूख से मर जाएंगे।
#चौथे ने जोशीले अंदाज में चीखते हुए कहा, टिकट कें पैसे का हिसाब दो? .......तुम जैसे अयोग्य आदमी को नौकरी कैसे मिल गई? तुम अनुभवहीन हो, तुम्हें तो नौकरी से निकाल देना चाहिए।
ड्राइवर सोच रहा था की वैसे तो ये हरामखोर बचाये जाने लायक नहीं थे, मगर मुझे तो अपना फर्ज निभाना था।
# इस कहानी का कोरोना काल में मोदी जी द्वारा किए गए प्रयासों से कोई संबंध नहीं है।
रक्तचरित्र