एक अधूरी आस हो तुम,
फिर क्यूँ सबसे खास हो तुम??
नज़रों से उतरी जो दिल में,
कभी न बुझने वाली,
वो प्यास हो तुम...
है,भ्रम दिल को,
मेरे पास हो तुम.....
नीरस से इस जीवन में,
खुशियों का एहसास हो तुम...
चेहरे पर नूर,
दो जहां का लिए....
भोर का उजास हो तुम....
सावन की पहली फ़ुहार में,
भीना सा सुवास हो तुम....
टूटते सितारों से,
दुआएं क़ुबूल होने का,
एक गहरा विश्वास हो तुम....!!!!
📝📝नेहा चौधरी की क़लम से ✍✍