शुरुआत मित्रता की होती, जब गुण आपस में मिलते हैं। इस दिल के मानसरोवर में, अगणित सरोज तब खिलते हैं।।
शुरुआत मित्रता की करने में, कोई बंधन ना आड़े आता।
दीन सुदामा मधुसूदन से,तीन लोक का वैभव पाता।।
राघव ने वानर राज संग, जब मित्रता की शुरुआत करी।
बालि को भेदकर निज शर से,सारी मर्यादा ताक धरी।।
#शुरुआत