हा सिगरेट, वैसी ही नही थी तुम!
सुरुआत में प्यारी, सुकून वाली ओर जैसा आखिर में होता है जानलेवा, लोग कहते है आसान है आदत छुड़ाना!
समज नही आता बात तुम्हारी हो रही है या सिगरेट की..
वो सिगरेट का धुआं जब आंखों में चुभता है, तो आंसू के साथ एक धुंधली तस्वीर बन जाती है, फिर वही घुटन।
उस दो पल के सुकून जैसी थी, तुम ओर सिगरेट।
हा सिगरेट, वैसी ही नही थी तुम........