कल गुजरते हुए
सड़क से
कार में बैठे हुए
ज्यों ही ठहरा
ट्रैफिक की लाल बत्ती पर
एक ज़रूरतमंद बच्चा
ठकठकाते हुए
कार का शीशा
हाथ फैलाए
कुछ मांगने लगा
ज़रा सोच में पड़ा
कि क्या दूं उसे
पैसे, खाना या कुछ और
पर जैसे ही देखा
उसके गंदले हाथों से
कार के चमकदार शीशे पर
पड़े गंदे काले निशान
तो -
देने का सारा भाव
काफ़ूर हो गया
और फ़िर
ट्रैफिक की बत्ती हरी हुई
पर मैं गुस्से से लाल होकर
बच्चे को धकेलते हुए
निकाल गया आगे ...
:- भुवन पांडे
#ज़रूरतमंद