साम के वक़्त में तुजे चिठ्ठी लिखूंगा
बातें सारी मिट्ठी मिठ्ठी लिखुंगा
तुम उसे इफ़्तयारी के वक़्त पढ़ना
में तेरे होठोके टक्करकी मिश्री लिखुंगा
तूम अपना रोझा ना तोड़ देना कही
में पुरानी बातें जूठी करके लिखुंगा
तूम अपने होठोको दांतो से दबाति रहेँगी
देखना में बाते ऐसी खट्टी खट्टी लिखुंगा
तूम शरम से पानी पानी ना हो जाये इसलिए
में सरारतो की बहुत ही कम लिटी लिखुंगा
देखो तूम आंखे जरा भी नम ना करना
चाहे , में सारे गीले शिकवे लिखुंगा
कोई ना पढ़ पाए तेरे सिवा
में इस अन्दाजमे शेर में तेरा नाम लिखुंगा
मुजे पता है तू चिट्ठी कहा छूपाएँगी
इसलिए में शब्दो के साथ मेरी उंगली लिखुंगा ।।