जिस शख्स को मेहबूब कह देते हे ,
उसके न होनेसे उसीके होने का सब से ज्यादा एहसास होता हे!
इश्क़ इसीको को कहते हे,ये कम्बख्त ऐसा ही होता हे !
उसीको ढूंढ़ती हे ये नज़र , पता हे वो आसपास नहीं होता हे ! इश्क़ इसीको कहते हे , ये कम्बख्त ऐसा ही होता हे!
जिससे पुरे दिन बात ना हो तो मन भारी सा होता हे, बात करते ही सबसे पहले ज़गडा होता हे ,इश्क़ इसीको कहते हे ,ये ऐसा ही होता हे!
जो खुश हो तो लगे पूरी दुनिया में ख़ुशी जैसा हे,
वो दुखी तो लगे पूरी दुनिया में गम सा हे,
इश्क़ इसीको कहते हे ,ये ऐसा ही होता हे ! (निधि).