Hindi Quote in Blog by Lalit Rathod

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बचपन का हर शनिवार एक ख़ुशी पैदा करता और रविवार का दिन शाम होते ही एकांत को तलाशता. घर की अंतिम दिवार पर पड़ने वाली धुप बेहद आकर्षित करती लगता यही एकांत है. जब कभी उसकी खोज पर निकलता एक शोर पीछा करते हुए पास आ जाता। जैसे उस शोर का पुराना नाता एंकात से है। यह डर हमेशा मुझे भीतर की दुनिया में लौटने में मजबुर कर देता। जब यह बार-बार होने लगा मैंने एकांत को छोड़ उस शोर को ढूंढना शुरु कर दिया। की क्या सच में शोर मुझे जानता है? जो हर बार एंकात के करीब पहुंचने के ठीक पहले मेरे साथ होता है। शोर से मिलने एक दिन खुले मैदान में आ पहुंचा और थोडी देर में चारों तरफ एक आवाज की तरह वह मेरे सामने था। मैंने तुरंत उससे एंकात के बारे में पूछा जबकि मुझे शोर के मिलना था। यह उसी तरह था जैसे टूटते हुए तारे को देख अचानक एक नाम याद आता है, पर वर्तमान से नाम का कोई नाता ही नही। शायद एक उम्मीद से एंकात के बारे में पूछा, क्या तुम उसे जानते हो? वह अभी भी मेरे पास था । फिर मैंने कहा, मुझे एंकात के पास ले चलो और वह शोर अचानक खत्म हो गया. और मैं भागता हुआ घर लौट लाया. एक वक्त बाद मैंने एकांत को अपनी यात्राओ में ढूँढना शुरू किया, पर यात्रा करने के बाद उसके मायने बदल जाते और वह जगह एक तीर्थ स्थल की तरह बन जाती.
एक दिन मित्र ने आकर कहा, आज उसके पास जा रहा, जिससे तो डरता है.
कौन ? वही हवाई जहाज,
मैं उसके शोर से डरता हूँ जहाज से नही.
मैं एक दिन जरुर पास जाऊंगा और सारे सवाल के जवाब ले आऊंगा.. शायद एकांत उसके पास हो? सालों बीत जाने के बाद मैं उस शोर के बेहद करीब था. उसे महसूस कर सकता था. मैंने सवाल किया आज मैं साथ हूँ फिर तुम किसका पीछा कर रहे?
उसने कहां, तुमने कभी खुद को आइने में देखा है? मेरा जवाब हाँ था .
पता है, तुमने खुद के चहरे की किसी और को देखा है. मैंने तुरंत खुद को देखा और एक कहानी नजर आने लगी. उतने में शाम की अंतिम धुप मेरे चेहरे पर थी.
उसने कहा यही एकांत है जिसके जाने का दुःख उसी तरह है जैसे किसी अपने से विदा लेने से लगता है. मैंने एकांत को पा लिया था. जब उसे मिलने फिर किसी यात्रा में निकला वह शोर आज भी मेरे साथ था. मुझे उसका कहना याद आ गया की खुद को आईने में देखना ही जीवन की पहली कहानी होती है, एकांत किसी जगह पर नहीं बस वो कहानी है जो बीते हुई समय की उन जगहों को एकांत बना लेती है, जिसे मैंने तीर्थ स्थल कहां है. खैर...♥️
(कोलकाता यात्रा के दौरान लिखा गया लेख)

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