में तेरे अंग अंग से वाकेफ हु
में तेरे पूरे बदन से वाकेफ हु
ये जो तेरे गालो के खड्डे है ना
जिसने कितनोकी जान ली है
में उन गहरे खंजन से वाकेफ हु ।।
ये जो तेरे गले पर गाउ है
ये बचपन मे मेने ही दिया था
तूने उसे हमारी याद में रहने दिया
हैं ना ...
में उस गाउ के दर्द से वाकेफ हु ।।
तेरे नाभी की दाई और जो तिल है
जिसे मेने कई बार चूमा है... और
हरबार तुजमे उठने वाली झंझनाहट से
में वाकेफ हु..... ।।
और...
बस... बस... बस...
में जानती हूं तुम
मेरे अंग अंग से वाकेफ हो
मेरे पूरे बदन से वाकेफ हो....
में तेरी बातो से वाकेफ हु
जो मरे बदन में आग डाल देती है
फिर में में नही रेहती तूम हो जाती हु...
और में ही खुदसे तुमको मिलवाती हु...
इस लिये में जानती हूं
तूम...मेरे अंग अंग से वाकेफ हो
तुम मेरे पूरे बदन से वाकेफ हो ।।।