बेधड़क कुछ मुसीबतें, आ गईं मेरे घर पे
दुनिया और देश से , पहुंची मेरे दर पे
चौखट पे अब नज़रें , गड़ा कर बैठी हैं वो
मुझे तो बस भरोसा है अपने सबर पे।
बेधड़क कुछ मुसीबतें आ गईं मेरे घर पे.....
लगा पहली नज़र में मुझे, कि ये तो एक है
फर्जी किसी देश का, वायरस ये फेक है
अध्ययन किया तो पाया, इसकी योनि है राक्षसी
बर्बाद करने वाली इसकी, शक्ति अनेक है।
अंकुश लगा सकूं बताओ, कैसे मैं डर पे।
बेधड़क कुछ मुसीबतें, आ गईं मेरे घर पे.....
मेरी और मेरे देश की, हालत है एक सी
बिखरता है सब जा रहा, नीयत है नेक सी
मै देखूं जान को या अब, जहान को देखूं
शतरंज में मिली हो मुझको, जैसे चेक सी
संघर्ष है अभी बाकी, मेरी दहलीज़ और दर पे
बेधड़क कुछ मुसीबतें , आ गई मेरे घर पे......
तरकीबों का हूं खिलाड़ी, तकदीरों का नहीं
विश्वास है मुझे खुद का, लकीरों का नहीं
आजमाने का हुनर गर तुझमें है ऐ वक़्त
तीरों का जोश है मुझमें , तुनीरों का नहीं
भारी पड़ूंगा उनपे और उनके असर पे
बेधड़क जो मुसीबतें, आ गईं मेरे घर पे।