प्रोब्लेम सबकी ज़िन्दगी मैं होता है बात गरीबी और अमिरी कि नही होती हर बार ,, ...बात किसीके जज़्बात समझने की होती है ,बात किसीकी भावनाए समझने की होती है ,बहूत अच्छा बना रहना जुर्म है जुर्म इस कलयुग मैं यहाँ बूरे को अपनाया जाता है औऱ अच्छे को ठुकराया जाता है क्योंकि कीसी के लिऐ अच्छा सोचना भी ग़ुनाह है,औऱ ज़्यादा अच्छे बनकर जीना भी ग़ुनाह है कोई बेकार मैं क्यू अपनापन अनुभव करवाना चाहेगा उसे पता होगा वो रिश्ते को निभाना जानता होगा ईन्सान अपनी गलती मान ले सच में उन लोगो का प्यार हो ,चाहे दोस्ती हो कभी खत्म नही होती रिश्तों को कभी अल्फाज़ो का मोहताज ना बनाएं अगर कोई खामोश हो तो आप आवाज बनिए हर छोटी बात पर लड़कर नही बल्की एक दूसरे को समझना ही सच्ची दोस्ती है आप किसी से माफी मांगते हो तो हर बार उसका मतलब ये नही की आप गलत हो क्योंकि कभी कभी रिश्तों को बचाने के लिए माफी मांगनी पड़ती है ग़लती चाहें किसी की भी हो रिश्ता तो अपना है ना रिश्ता मोतियों की तरह होते है अगर गिर भी जाये तो जुक कर उठा लो" सच्चे की है बोलबाला जगत मैं जुठे का मुंह काला " लेकिन चल रही ऐ जिंदगी की तस्वीर ही कुछ अलग है "यहाँ जूठ की है बोलबाला ,सच्चे का मुंह काला" बस वही वक़्त हो गया है अब .....!!!!!
@तुषारकुमार