मिले इस कदर की कट से गए हैं
दुआओँ में हम तो बंट से गए हैं !
ज़माने में ऐसे मिले हमको साथी
धूप में साए जैसे छंट से गए हैं !
छांव की चाह थी और बादल भी
रूके जो पल को तो हट से गए हैं !
सन्नाटों का दौर गुंजता जा रहा था
आहट हुई और वो झट से गए हैं !
बहुत नाज़ था अपनेपन पे हमको
हुआ ऐसा कि दिल फट से गए हैं !
आशा गुप्ता 'आशु'