अजीब बात थी.. हजार धोखे खाने के बाद भी मैंने उसे अपना मान लिया... और यह समझती रही कि अब नहीं होगा कोई विश्वासघात मेरे साथ..बड़ी निश्चिंत सी सहज जी रही थी मैं उसके साथ... अपने हर दुख सुख को बांटते हुये... यही लगता रहा कि वो मेरे हर दुख में दुखी और मेरे सुख में सुखी हो रहा है.... . लेकिन समय अपनी कालिमा में फिर वही छल लेकर आया....क्या पता था कि मैं उसकी शिकार हूं जिसे वो इसलिए दुसरा रहा था कि एक दिन.... आखिर उसने मेरी पीठ पर छुरा भौंक ही दिया.... विश्वासघात जीत गया.. और विश्वास हार गया..!
#शिकार #आशुअंडमानी