बहुत गहरा है जख्म, भरेगा ही नहीं,
दर्द सहते रहेना, मरहम मिलेगा नहीं ।।
उफ़! भी कर नहीं सकते, बीरहाना,
हवा भी महकती ,संदेशा लाएगा नहीं।।
ख़ामोश है निगाहें, इन्तज़ार ए आलम,
मौज ए मिलन यार, वोह मिलेगा नहीं ।।
अश्कों की भीड़ चीरकर नीकली वफ़ा,
राहें ग़म एहसास जिंदगी टुटेगा ही नहीं।।
मुनासिब है यह इबादत का सिलसिला,
आनंद रिस्ता रुहानी जिंदगी छुटेगा नहीं।।