१.ऐ दिल ठहर जा ,
अब तेरी जरूरत नहीं ।
क्योंकि यहां रिश्ते दिल से नहीं ,
दौलत से निभाए जाते हैं।।
२.दिल को शीशा कहा गया
दिल को पत्थर कहा गया ।
दिल तो उन बूंदों का समंदर है
जिन पर सबको अधिकार मिला।
३.नफ़रत हो या मोहब्बत,
दिल ना हो तो ये शब्द मायने नहीं रखते ।
- नवनीत सिंह "नवीन"
#दिल