#दिल
रातों का सुकून दिन का चैन गवा बेठे हैँ
जबसे हम दिल लगा बेठे हैं |
देखो अब ज़िंदा लाश बनकर घूम रहे हैँ
दिल टूटने की मातम में झूम रहे हैँ ||
दुनिया में इतने खेल होते हुए भी
लोग दिल से क्यों खेल जाते हैँ,
किसीके करीब जाकर दूर होने में
नजाने कौनसी खुशी पाते हैँ |||
अच्छा नहीं लगता अब ऐसे बनावटी दुनिया में जीने में
कितने साज़िशें छुपा रखे हैं लोग देखो सीने में |||
रो लेती हुँ, आँखें नम होजाती है
कमसे कम दिल का दर्द कम होजाता है |||
सच कहते हैँ दिल में बसने वाले अक्सर होते हैं हरजाई
हमने भी ये तब जाना जब चोट ज़िगर पे खाई ||||