#बनावट
जब अपने ही अपनों से खोट करने लगे
बिन कहे बिन सुने चोट करने लगे
तब सेबरी के राम बन के आना प्रभू
कुछ नहीं है सिवा बस यहां धर्म के
प्रेम गंगा सा निर्मल बनाना प्रभू
ये बनावट तुम्हारी ये सजावट तुम्हारी
तुम ही भरते हृदय में सदाचार हो
मन में भक्ति भरो तन में शक्ति भरो
मिटा दो हृदय से जो न स्वीकार हो
जो रखते हैं ईर्ष्या कपट भावना
उनके मन को तुम ऐसे जलाना प्रभू
जैसे रावण की लंका जली आग में
किन्तु विभीषण की कुटिया बचाना प्रभू
कुछ नहीं है सिवा बस यहां धर्म के
प्रेम गंगा सा निर्मल बनाना प्रभू
मै करूं छल अगर अपने परिवार से
प्रभु उठा दो मुझे इस संसार से
मेरी आंखों में रहे दया भावना
ऐसे मधुबन ही मन में खिलाना प्रभू
बच सके यदि मेरे बिन धरोहर हमारी
फिर मुझको नहीं तुम बचाना प्रभू
कुछ नहीं है सिवा बस यहां धर्म के
प्रेम गंगा सा निर्मल बनाना प्रभू
।। ज्योति प्रकाश राय ।।