*‼।। श्रीकृष्ण ।।
‼*राम राम सा‼
*हाथ की लकीरें भी*
*कितनी शातिर हैं..*,
*कमबख्त मुट्ठी में हैंं*
*लेकिन, काबू में नहीं.....*
*✍”घड़ी की फितरत भी अजीब है, हमेशा टिक-टिक कहती है, मगर, ना खुद टिकती है, और ना दूसरों को टिकने देती है !”*
🙏🙏 *जय सियाराम जी*🙏🙏
🙏🌹शुभ प्रभात 🌹🙏
🕉🌅🙏आप का दिन शुभ मंगलमय हो🙏🕉🌅