मेरी हर याद है उसी से संबंधित
मेरी हर आरज़ू उससे जुड़ी है
वो कही भी नहीं तो भी यही है
शायद वो मेरे भीतर छिपा है
मेरा साया समेटे मुझमें मिला है
मुझसे मुखातिब करता बगावत
दुनिया की ओर से आंख मींचे
पीकर मेरे जिगर का गर्म लहू
अभी तक वो पला है बढ़ा है
अंधेरों में कैद करके मुझे वो
दूर ले जाएगा इस जहां से
नहीं मयस्सर उजाले का टुकड़ा
इस कदर वो है मुझसे जुड़ा
#संबंधित