My Realistic Poem....!!!!
पयदा तो इन्सान ही बन के हुआ था
पर रंगते जहाँ की बदलती रही फिर
मुझे मेरे मुस्लिम होने पर नाज था
तुझे भी तेरे हिन्दू होने पर नाज था
लेकिन आज ...!!
आज प्रार्थना-ओ-आरती बंध है
नमाज़-ओ-अझ़ान भी तो बंध है
अल्लाह मेरा भी मुझ से नाराज है
और राम तेरा भी तुझसे नाराज है
गुनाह तो मैंने भी किए होंगे कभी
पाप तूने भी किए हों शायद कभी
इंसानियत को खोने की सजा ही
शायद मालिक हम को दे रहा है
ना रामजी तूझे मंदिर में बुला रहे है
ना खुदा मुझे मस्जिद में बुला रहा है
जी हाँ खता तो मेरी भी उतनी ही है
और गलती तो तेरी भी उतनी ही है
आ वक्त रहते हम संभल जाएं और
इंसानियत के धर्म को फिर अपना ले
मैं चाहे उसे रब या अल्लाह कह लू
तू उसे प्रभु या भगवान भले कह ले
समाया है तो हर एक इन्सान में
बस एक ही प्रभु-ईश्वर-अल्लाह
आओ हिंदू मुस्लिम को छोड़कर
चलो हम सब मिलकर एक बने
और नेक बने इन्सान बने मुस्कान
से मिल सिर्फ भारतीय प्रत्येक बने
अब तू अपने राम को खुश कर
मैँ भी अपने अल्लाह को मनाऊं
इस संकट से इन्सानों को मुक्त
करो दो हों प्रभु-ईश्वर-अल्लाह
अवसर दो ताकि हम सब एक बार
फिर से मिल कर इंसान बन जाए..!!
🙏 🏠Pls stay home 🏠 🙏
🙏🏠pls Stay Safe🏠🙏
ईश्वर हम सब को एक ओर नेक बनाये
✍️🥀🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🥀✍️
#Born