बस एक नमन श्रद्धा सुमन से, करबद्ध करती प्रार्थना.
क्रान्ति थे तुम तब,भ्रान्ति मे डूबा हुअा ये समाज जब,
मत थे विभिन्न ,मानव था खिन्न ,बिखरा हुआ ये समाज था.मानव मे मानवता थी गुम, छूत और अछूत से, जीवन तो था ,जीवित मगर ,रहने का न अधिकार था. न किया है भेद उसने(ईश्वर),यह समझ पर थी कहाँ ? धर्मिक तो थे बहुत पर धर्म की समझ न थी. तुम वहीं के थे कमल कीचड़ समझते थे जिसे.थे अकेले आप मे पर दिव्यदृष्टि. साथ मे.ruchi. महामानव डॉ.भीमराव अम्बेडकर की जयन्ति पर शत-शत नमन.
#विभिन्न