ये कितना बड़ा आसमाँ हैं , पर मेरे इरादे इससे भी बड़े हैं
बस कुछ दूर बाहें फैलाये सपने मेरे भी खड़े हैं
इतनी बार ठोकर लग के गिरा हूँ , पर हौंसले मेरे लड़ने के लिये अब भी अड़े हैं
एक अरसा हो गया मेहनत करते हुए , इन रास्तों पे कुछ निशान तो मेरी मेहनत के भी पड़े हैं ||