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Sukhi Rappria

Sukhi Rappria

@sukhirappria.254607


ये कितना बड़ा आसमाँ हैं , पर मेरे इरादे इससे भी बड़े हैं
बस कुछ दूर बाहें फैलाये सपने मेरे भी खड़े हैं
इतनी बार ठोकर लग के गिरा हूँ , पर हौंसले मेरे लड़ने के लिये अब भी अड़े हैं
एक अरसा हो गया मेहनत करते हुए , इन रास्तों पे कुछ निशान तो मेरी मेहनत के भी पड़े हैं ||

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एक आहट सी होती हैं दिल में , जब भी मैं जाता हूँ उस कल में
वो कल जो बीत गया ,पर जिन्दा हैं अब भी इस पल में
मन करता हैं बिता दूँ पूरी जिंदगी उस सपने में
सिमटी हुई हैं पुरानी यादें जिस अपने में
कुछ अधूरे ख़्वाब हैं उस बीते हुए पल के , कुछ लोग हैं अधूरे , गुमसुदा उस कल के
लोग जिनकी मुझे अब भी तलाश हैं |
दिल कहता हैं निकल जाऊँ इस तलाश में , पर रोक लेता हैं मन मुझे खुद की तलाश में
जब भी आती हैं कड़वाहट मेरे आज में ,मन ले जाता हैं फिर उस पुरानी तलाश में
क्योंकि जी भरके जी नहीं पाया उस एहसास में
कैसे समझाऊं इस दुनिया को , की क्या मायने हैं उस पल के
एक एहसास तो हैं ,पर लफ्ज़ नहीं हैं उस कल के
वो दिन भी क्या दिन होगा , जब वो कल हर पल होगा
मैं खो जाता हूँ इसी एहसास में , की कितना सुकून होगा जब वो होगा पास में
मैं भागता रहूँगा की वो कल कभी तो आये ,
मैं जागता रहूँगा की वो पल कभी तो आये
की वो मेरा एहसास बच जाये
की वो मेरा आज बन जाये
की वो मेरा अंजाम बन जाये |

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