काश कि तू मुझे एक बार यूं ही कहीं मिल जाए
मुलाकात की बारिशो में
और मै तुझसे पूछ सकू वो प्रश्न
जो नहीं पूंछ सका पहले कभी
हां जब पहले हम रोज ही मिलते थे अक्सर
और पुंछा करते थे बेमतलब के सवाल
एकदुसरे से लेकिन कभी नहीं पूछ सके वो सवाल
जो तेरी नजरो में हमेशा ही मुझे नजर आता था
पता नहीं कि तूने भी कभी महसूस किया या नहीं
मेरी आंखो का वो सूनापन जो तेरे आने से पहले
और तेरे जाने के बाद आ जाता था
मुझे हमेशा से लगता रहा था
की तुम भी मुझसे कुछ पूछना चाहती थी हरदम
पर ना जाने क्यों हम अकेले में मिलते ही सकुचा जाते थे
तुम सारे जहां की चुप्पी ओढ़ लेती थी
और मै तो सबकुछ भूल ही जाता था
तुम्हारा तो मुझे नहीं मालूम
लेकिन मै हमेशा तुमसे ही पहल करने की उम्मीद करता था
शायद अब मुलाकात भी हो तो वो पुरानी बात ना होगी
तुम अपने बंधनों में बंधी शरमा जाओगी
और मै तुम्हारी शरम देख कर घबरा जाऊंगा
तुम मुझसे नजर मिला कर झुका लोगी
और मै उन नजरो में ही गड़ कर मर जाऊंगा
और वो प्रश्न अब वैसे का वैसा ही अधूरा धरा रह जाएगा
इससे बेहतर तो यह होगा कि अब मुलाकात ना हो
#मुलाक़ात