सुनो
चाय का कप जो हर सुबह तुम्हे मिलता है , मुझे वो बना लो
या चाबी का गुच्छा
जो तुम्हारे पल्लू से लटकता है,
वो दामान जो तुम्हारे दिल के करीब रहता है ,
या दीवार पे टंगा शीशा
जो
मैं बनके
हर दम तुमको देखता है,
वो तकिया जिसपे तुम्हारा सर टिकता है
या वो टेडी बीयर
जो तुम्हारे गले लगता है ,
वो तौलिया
जो तुम्हारे बाल सुखाता है
या छत का पंखा
जो तुम्हे मीठी नींद सुलाता है
या चाहो तो
मुस्कुराहट बनाके
अपने होठों पे सजा लो,
या बना लो मुझे कंगन जो तुम्हारे हाथों में खनकता है,
नहीं तो काजल
जो तुम्हारी आँख में सजता है
या सब छोडो
बस बना लो
मुझे अपना दिल
जो तुम्हारे सीने में
धड़कता है!!