पहचान...
महामारी का यह वक्त भी गुज़र जाएगा,
यह दौर इन्सान की पहचान भी सीखा देगा।
मजहब की आड़ में फ़ैला बीमारी,
हैवान वह कहलाएगा।
गुरुद्वारे पर हमला सह,
खाना भी उन्हें वही खिलाएगा।
वह इन्सान, इन्सान न रहकर ' फरिश्ता ' कहलाएगा।
समाप्त होगा आधिपत्य विश्व पर,
जो कहे भारत से कुछ ना होगा।
कड़वा यह घूंट भी पी,
भारत मदद का हाथ बढ़ाएगा।
कुछ सीख और कुछ सीखा, डंके की चोट पर,
विश्व फलक पर भारत का परचम लहराएगा।
✍🏻.. पंकिल देसाई