एक तितली का जीवन जब प्रारंभ होता है तो वह कई भागों में विकास करती है और जब वह सुंदर सजी ले पंखो के साथ उड़ने लगती है तब हमें ज्यादा आकृष्ट करती है यदि हम उसके प्रारंभिक विकास को देखें तो शायद हमें इतना आकर्षण उसे पकड़ने का ना करें परंतु उसके रंग-बिरंगे परों को देखकर मन आकृष्ट हो जाता है लगता है खुद फूल बन जाओ और जब वह बैठे तो उसे अपने आप में कैद कर लो ऐसे ही मनुष्य का जीवन भी सुख की चाह में वह तरह-तरह के दुखों को भोगता है अगर प्रारंभ में ही और सुख की लालसा का त्याग कर दे तो वह जीवन पर्यंत सुखी रहेगा सुख की लालसा ही उसके दुख का मार्ग प्रशस्त करती है
#प्रारंभ