अब ये हो गया कुछ एसा की उनसे मिलके हम खुद से नहीं रहते...
ये इश्क तो नहीं हो सकता, अगर इश्क है तो नामंजूर है मुझे ये...
उससे बात करने की कीमत मेरे वजूद का खोना तो नहीं हो सकता, अगर है कुछ एसा तो चुप्पी रास है मुझे...
जिंदगी मेरी है, इसमे हक किसी और का नहीं.. होता मन अगर काबु मेरा तो यू तड़पता ना उससे बात करने को...
गाँठ है ये कुछ ऐसी की मैं बंद चुका हू इसमे, प्रयास भरसक किए है आज़ाद होने के, पर खोल पाऊँ मैं वो गाँठ भी केसे एक सिर्फ दिमाग ही तो है जो खिलाफ है उसके...
बाकी तो बागी हैं, छवि मेरी नजरो मे मेरी बन रही दागी है..
हूं बेबस लाचार मैं इस कदर की मेरा रोम रोम रोता है जब दिमाग उसको दूर कहीं फेंकने का प्रयास करता है...
दुखदायी है जीवन मेरा, पथभ्रस्ट तो पहले से ही हू मैं.. पथिक भी हू उस पथ का जो ना मेरी मंजिल को जाता है...
अब किसी का हंसना भी रुदन सा लगता है, है पीडा क्या उसकी अन्तर बस उसको खोजने लगता है..
हूं अकेला मैं इस भीड़ समाज में, गुम है वो शीतल किरण भी इस सूरज रूपी दुनिया मे...
होता हूँ जब मैं खुशी-भ्रम में, आँखों से पानी बहता है.. दूर से आता वो दुख-तीर छाती को छन्नी करता है...
वेदनाओं से भरा जीवन, ज़िंदगी को कठोर बनाता है..
आता है एक पल खुशी का जो जीवन का महत्त्व बढाता है...
#Sentiment