My Sorrowful Poem...!!!
यारों आज बिरान-से गाँव-ओ-शहरों
का कातिल-सा सन्नाटा ही बता रहा हैं
हम इन्सानों ने उस महान कुदरत को
यारों बेहद नाराज़-ओ-रुसवा किया हैं
बात बात पर बिलावजह नादाँ बंदा यह
कहता था आज वक़्त मेरे पास नही हैं
आज उस परवरदिगार ने हम सब के
दिए ज़ख़्मों से वक़्तको ही रोक दिया हैं
दिए तो प्रभुजी ने हमें सुधरने के मौक़े
अनगिनत पर हम मनमानी करते रहे हैं
लूटी लाज मासुम बच्चीऔ की खूनरेंजी
लूटपाट जुर्मों-सितमों की सीमा कहा हैं
इन्सान इन्सान के खून का प्यासा बना
जूठ फ़रेब धोखा दरिंदगीं बात आम हैं
आज ऑसु खुन के सन्तुलन बनाने में
नाकाम हैं किए करमो की बस सज़ा हैं
कब कैसे वह प्रभु हमारे करमों को माफ़
करेगा यह उसके इख़्तियार की बात हैं
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