कविता ..
विषय .क्रोरोना ..
आया संकट चीन से ,सबके दिल हिलाय ।
लाख सब कोशिश करें ,पर यह रुक नहीं पाय ।।
संसार सारा भय त्रस्त ,आंशकाओ से धबराय ।
अब कोई बचाने वाला नहीं ,प्रभु केवल सहाय ।।
गर्व से बहुत उछलता ,देता परमाणु बम की धमकी ।
सब कुछ पल में सांप सुंध गया ,छूंमतर हो गयी गीदड़ धमकी ।।
प्रकृति को छेड़ने वाले ,अब पल में हुए असहाय ।
अब तो धर में धुसे रहो ,नही तो पल में जान जाय ।।
जो मनमानी अब की तो ,क्रोरोना करेगा चूस्त ।
दवा दारु नही मिलेगी ,जाना पडेगा वैकुंठ धाम ।।
मानव तू तो बहुत इतराता ,अपनी सुदंर भुजा उठाय ।
पल में तेरा गर्व छीन लिया ,तुझे धर के बिल में छुपाय ।।
अभी तो इतराना छोड़ कर ,ले प्रभु की अब शरण ।
नहीं तो पल में तुझे ,प्रकृति करेगी तेरा भक्षण ।।
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