संरेखित है जीने की डोर हमारी,
मेरी तुजसे बंधी, तेरी बंधी मुझसे,
शुक्र गुजार हु उस खुदा का जिसने मिलाया तुसजे,
वरना में तो अनजान था कभी खुद ही खुदसे,
तुज में मुजे दिखी रब की परछाई मुजे,
ज़ुक गया सर, कैसे समजाउ अब तुजे,
तू ही जीने का जरिया है, बस तू ही मेरा प्यार है,
अब न चाहिए कुछ और मुजे मेरे जीवन में,
बस मिलजाए तू मुजे हर एक जनम में !!!
#केप्टन @श्याम
#संरेखित