माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तित्व होते है।
माँ के पास अश्रूधारा तो पिता के पास संयम होता है।
दोनो समय का भोजन माँ बनाती है तो जीवन भर भोजन की व्यवस्था करनेवाले पीता को हम सहज ही
भुल जाते है।
कभी लगी जो ठोकर या चोट तो "ओ माँ " ही मुँह से निकलता है। लेकिन रास्ता पार करते कोइ ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो "बाप रे " यही मुँह से निकलता है।
क्योकी छोटे छोटे सकंटो के लिए माँ है पर बडे सकंट आने पर पिता ही याद आते है। पिता ऐक वटवृक्ष है जीसकी शीतल छाँव मैं संम्पूर्ण परिवार सुख से रहता है।
love u mom💓💓love u dad