पूर्ण चंद्र की साक्षी,
किया कलुष सब दहन।
शेष रहा प्रह्लाद मन,
जो श्रीहरि प्रेम मगन ।।1।।
नव प्रभात अब निकल पड़े,
रंगने धरती अम्बर।
लाल-गुलाबी नीले पीले,
दिखते सब नारी-नर।।2।।
तन रंगकर,मन रंग रहे,
ऐसे पक्के रंग।
लगता माधव थिरक रहे हैं,
यहाँ राधिका संग ।।3।।
होली की प्रेम रस पगी,
शुभकामनाएं 🙏🙏