My New Poem...!!!!
यारों सीरियल हो पिक्चर हो
या हो महफ़िल-ए-मुशायरा..!!
हर फ़न बाँधता है माहौल पहले
सिमटकर सोचको बनाता दायरा..!!
झँझोड़कर आपके ज़हन की हर
नस को फ़न की दाद़ करता गँवारा..!!
फ़न को फ़न तस्लीम करना दिल से
आसान तो नहीं पर हे ही ग़ज़ब नज़ारा
जिसे देख दिल भी बेशाँखता बोलता
वाह वाह क्या ख़ूब है यारों यें तराना..!!
बस इसी कश्मों-कश में चल पड़ता हैं
हर एक फ़नकार से सज़ा हूँआ फँसाना
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