जब कड़वा कभी चखा ही नहीं तो मीठा और कड़वा का फर्क कैसे समझेंगे . देखिये सुमित्रा नंदन पंतजी की कविता ..
मैं नहीं चाहता चिर सुख
मैं नहीं चाहता चिर दुःख
सुख दुःख की खेल मिचौनी
खोले जीवन अपना मुख .
सुख दुःख के मधुर मिलन से
यह जीवन हो परिपूरन
फिर घन में ओझल हो शशि
फिर शशि से ओझल हो घन
from USA
#जिंदगी