मैं काव्य हूँ, मैं शास्त्र हूँ,
मैं इस धरा पर ज्ञान हूँ।
मैं शस्त्र हूँ, मैं युद्ध हूँ,
मैं इस धरा पर शौर्य हूँ।
मैं धर्म हूँ, मैं गर्व हूँ,
मैं इस धरा पर चेतना हूँ।
मैं छंद हूँ, मैं गीत हूँ,
मैं इस धरा पर प्रीत हूँ।
मैं स्नेह हूँ, मैं प्रेम हूँ,
मैं इस धरा पर संजीवनी हूँ।
#अंतरराष्ट्रीय_महिला_दिवस