( महिला दिवस पर एक नारी की पीड़ा )
क्या हुआ??
इतनी रात तक online हो? 1 बज रहे है। नींद नही आ रही है क्या?
पति घर पर नही है या बनती नहीं है उनसे?
ध्यान नहीं देते क्या तुमपे?
जवाब नही दो तो ..क्या हुआ? Busy हो कहीं??? किसी और से बात कर रही हो???
या फिर कहेंगे हमसे भी बात कर लिया करो। इतने बुरे हैं क्या हम। सबसे तो करती हो। तो इस सवाल का एक ही जवाब है । मैं एक औरत हूँ
लेकिन एक इंसान भी हूँ । मझे अपनी मर्जी से जीने का पूरा हक हैं। मुझे जो - जो पसंद आता है मैं वो करती है या फ़िर मुझे जिससे खुशी मिलती हैं वह करती हूँ..
और मुझे ये सब आता भी हैं.
ये सब करने के पीछे ऐसा कोई कारण होता हैं...
ऐसा कुछ नहीं होता..
बस मुझे इन छोटी-छोटी चीजो से खुशी मिलती हैं। जरूरी नही फेसबुक पर सिर्फ चैटिंग ही की जाए। बहुत लोग फेसबुक पर सिर्फ चैट करने नहीं बल्कि पोस्ट पढने आते है..कोई लेख, कोई अच्छी पोस्ट, या कोई सुविचार रात मे पढ़ना कोई गुनाह है क्या? दिन भर की जद्दोजहद के बाद यदि रात में कुछ समय हम अपने लिए व्यतीत करे तो क्यो बुरा लगता है आप लोगो को....
वही काम आप करे तो हम तो सवाल नहीं उठाते। फिर आप लोग क्यों?
मुझे तो इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती।
आपको भी जमता हैं तो आप भी ये सब कीजिए खूब देर रात online रहिए, और नही जमता तो....
किसी भी औरत के ऊपर बेमतलब के आरोप मत लगाइये और किसी भी प्रकार का लेबल मत लगाइये उसके ऊपर
बस इतना ही....
मै सिर्फ उन पुरुषो की बात कर रही हूँ जो ऐसी सोच रखते है..